Wednesday, 8 May 2013

आज एक लोकार्पण समारोह हेतु ओपन विश्व वि . जाना हुआ .कुछ देर पीछे की लाइन में बेठी रही ....आगे जगह खली होते ही वहां आ गई .पास में एक बहुत ही गरिमामय ,शालीन महिला बेठी थी .मुझे देखते ही ...कह उठी ...'आप एक दम ड़ोल (गुडिया ) लग रही हो .आप आई तब से मैं कई बार पीछे मुड़ मुड़ आप को देख रही थी . .....आप बहुत खुबसूरत हो .फिर कहा आप को तो ऐसे कॉम्प्लीमेंट रोज ही मिलते होगें .कुछ देर बाद किसी बात पर फिर कहने लगी 'अपनी खूबसूरती का फ़ायदा तो उठाओ .......ये सब सुन कर मैं तो अवाक् रह गई ....मुझे शुक्रिया तक नहीं कहने दिया .....मेरे कृतार्थ भाव को उन्होंने महसूस कर लिया था .....इस तरह का कोम्प्लीमेंट ......फिर पूछा कहाँ रहती हो ......ये भी कहा .....एकमहिला द्वारा महिला की तारीफ़ हो रही हे ......ये भी गजब की बात हो रही हे ........संकोच से मेरा हाल जो था .......उन से कार्ड लिया तो पता चला .....ये प्यारी महिला उच्च न्यायलय की जज श्री मती चित्रारेखा चोधरी जी हें .सच तो ये हे चित्रारेखा जी की नजर .....मन खुबसूरत हे .मुझे मैं कभी खुबसूरत नहीं लगी ....हाँ ईश्वर ने मन जरुर सरल दिया हे ....वहां मेरे द्वारा पदी गई गजल भी सभी श्रोताओं ने बहुत पसंद की ......कभी ...कभी ऐसा भी ......आप से ख़ुशी बाँट कर .....अच्छा लग रहा हें .....शुक्रिया ...चित्रारेखा जी व आप सब को ढेर सारी दुआएं ......सब ईश्वर का दिया हुआ हे ....

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