Sunday, 18 March 2012

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Devraj Upadhyaay Puraskaar

मित्रों ,आप सब कि दुआओं से कल ,११,मार्च को राजस्थान सहित्य अकादमी द्वारा मरी पुस्तक 'ज्योतिर्गमय ;को 'देवराज उपाध्याय पुरस्कार -२००८ -०९ ' प्रदान किया गया हे .कार्यक्रम उदयपुर में हुआ .इस पुस्तक में सांस्कृतिक निबन्ध हे .please ,ऐसे ही अपना स्नेह बनाये रखियगा . समारोह कि कुछ तस्वीरें .....
 

Kam se kam saamaan rakhna !!

कम से कम सामान रखना

कम से कम सामान रखना
ज़िन्दगी आसान रखना
फ़िक्र औरों की है लाज़िम
पहले अपना ध्यान रखना
हर कोई कतरा के चल दे
ऐसा क्या अभिमान रखना
भीड़ में घुलमिल के भी तू
अपनी कुछ पहचान रखना
ज्ञान बिन है व्यर्थ जीवन
कम से कम ये ज्ञान रखना
कर निबह काँटों से लेकिन
फूल का भी ध्यान रखना
तेरे दिल में जिसका दिल है
उस में अपनी जान रखना
हिज्र मज्ब़ूरी है कमसिन

Thursday, 8 March 2012

अब कि बार /अरे ओ फागुन
मन का आँगन रंग -रंग कर जाना
युगों -युगों से भीगी नहीं बासंती चोली
रही सदा ही सुनी -सुनी मेरी होली
पुलकन सिहरन अंग अंग भर जाना .../..
अजब हवा हे मन के मोसम बहक रहे हे
दावानल सम अधर पलाशी दाहक रहे हे
बरसा कर रति रंग दंग कर जाना ....
बरसों बाद प्रवासी प्रियतम घर आयेगें
मेरे विरह नयन लजाते सकुचायेगें a
तू पलकों में मिलन भंग भर जाना ....
कृष्णा कुमारी
(अपने कविता सग्रह से )