Thursday, 4 July 2013

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ग्रीन -ग्रीन धरती हुई ,मेघ -मेघ आकाश 
रेनिग -रेनिग चार सू ,मगर नहीं अवकाश 
कृष्णा

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मित्रों आज जुहू बीच chopati गए मगर ज्वार आने की वजह से बीच तक नहीं जाने दिया लेकिन सागर देखने का आनंद आ गया ..सात सालों में इतना भरा हुआ सागर पहली बार देखा था ..जेसे बाद आ गई हो ....तूफानी हवा ...ऊँची ऊँची लहरें ....फिर दुसरे तट पर गए वहां भी लबालब .....चट्टानों पर टकराती लहरों से खूब मस्ती की .....आधा उन्होंने भिगो दिया ...तभी भारी ईश्वर का भी बारिश आ गई खूब जम कर नहाई ...बहुत आनंद ...आज कुदरत महरबान रही .....उसका शुक्रिया .......ईश्वर का भी ....

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@मुंबई ........
मित्रों इक महीने से मैं लगभग सफ़र में रही .इस बीच मैं अखबार ,नेट ,टी वी .यहाँ तक कि फ़ोन से भी लगभग दूर रही .....यानि पूरी तरह से अवकाश ....पर रही .......इस बीच दिल्लीमुंबई , .श्री नगर .पहलगाम .गुलमर्ग।सोनमर्ग .खिलनमर्ग .पत्निटोप .जम्मू .हेदराबाद रही .अब वापस आप सब से जुड़ गई हूँ .आप सब की इस बीच की गतिविधियों से जुड़ने का प्रयास करूगीं आप को इस बीच बहुत मिस किया ..याद भी किया ....साल भर की भाग दोड़ धुप के बाद इतना तो बनता ही हे ना .....शुक्रिया हाँ प्रकृति के साथ रहने में अदभुत अहसास मिला ....लाजवाब .....अरे हाँ .इस सफ़र के सब से खुबसूरत पल रहे ....पूर्णिमा की चांदनी रात में नौका विहार और खिलनमर्ग में चारों ओर बर्फ ही बर्फ का अदभुत मंजर ..............

Saturday, 18 May 2013




तू हें परबत ,मैं तेरी गोद की नदिया हो जाऊं 
घुल के बह जाये अना जिस में वो धारा हो जाऊं 

कोई छेड़े तो सही धुन वो कन्हेंया वाली 

मैं तो अजखुद ही महारास की राधा हो जाऊं 
कृष्णा

Wednesday, 15 May 2013



ये मेरे बड़े भाई सा हें .जब ये लीबिया गए थे ,तब मैने उन्हें बहुत ...याद करते हुए उन की ये तस्वीर बनाई थी .....केसी लगी बताइयेगा ...




मेरी प्रकाशित कुछ पुस्तकें --


Wednesday, 8 May 2013

आज एक लोकार्पण समारोह हेतु ओपन विश्व वि . जाना हुआ .कुछ देर पीछे की लाइन में बेठी रही ....आगे जगह खली होते ही वहां आ गई .पास में एक बहुत ही गरिमामय ,शालीन महिला बेठी थी .मुझे देखते ही ...कह उठी ...'आप एक दम ड़ोल (गुडिया ) लग रही हो .आप आई तब से मैं कई बार पीछे मुड़ मुड़ आप को देख रही थी . .....आप बहुत खुबसूरत हो .फिर कहा आप को तो ऐसे कॉम्प्लीमेंट रोज ही मिलते होगें .कुछ देर बाद किसी बात पर फिर कहने लगी 'अपनी खूबसूरती का फ़ायदा तो उठाओ .......ये सब सुन कर मैं तो अवाक् रह गई ....मुझे शुक्रिया तक नहीं कहने दिया .....मेरे कृतार्थ भाव को उन्होंने महसूस कर लिया था .....इस तरह का कोम्प्लीमेंट ......फिर पूछा कहाँ रहती हो ......ये भी कहा .....एकमहिला द्वारा महिला की तारीफ़ हो रही हे ......ये भी गजब की बात हो रही हे ........संकोच से मेरा हाल जो था .......उन से कार्ड लिया तो पता चला .....ये प्यारी महिला उच्च न्यायलय की जज श्री मती चित्रारेखा चोधरी जी हें .सच तो ये हे चित्रारेखा जी की नजर .....मन खुबसूरत हे .मुझे मैं कभी खुबसूरत नहीं लगी ....हाँ ईश्वर ने मन जरुर सरल दिया हे ....वहां मेरे द्वारा पदी गई गजल भी सभी श्रोताओं ने बहुत पसंद की ......कभी ...कभी ऐसा भी ......आप से ख़ुशी बाँट कर .....अच्छा लग रहा हें .....शुक्रिया ...चित्रारेखा जी व आप सब को ढेर सारी दुआएं ......सब ईश्वर का दिया हुआ हे ....