Wednesday, 3 April 2013





          
बहकी -बहकी चाल हे ,बदले बदले ढंग
लगता हे सरकार ने पी , रक्खी हे भंग

ये बात किस के लिए कही हे नहीं बताऊंगी ...
आप सब को होली मुबारक ....



                                               STN पर प्रसारित  कवि गोष्ठी का  एक क्षण !

Sunday, 6 January 2013






रहे न कोई दुखी जहाँ में ,सुखों की बारिश हो आसमां से
रहेंगे मशगूल इसी दुआ में ,करेंगे स्वागत नए साल का

हरेक पल इक पर्व हे ,जी भर जिओ यार
प्रीत के संगीत को ,जिए सब संसार
सभी मित्रों को अखिल सृष्टी को नव वर्ष की शुभकामनायें .............शुभकामनायें
 
 

Monday, 15 October 2012

लो चाँद के आगोश से निकल रही हे चांदनी
बे सब्र -सी जमीं पे क्यूँ टहल रही हे चांदनी
कब तक छुपेगा हा ले -दिल ये हो ही जायगा अयाँ
क्यूँ बात ,बात -बात में बदल रही हे चांदनी

Thursday, 19 July 2012

मित्रों ,कुछ दिनों पहले पंजाबी भषा के विद्वान् श्री मान हरबंस जी का फ़ोन आया ,कहा कि अभी अभी आपकी कृति 'आओ नैनीताल चलें 'पद कर पूरी कि हे .दिल्ली के अंतर्राष्ट्रीय पुस्तक मेले से खरीदी हे .ऐसा लग रहा हे कि मैं नैनीताल में ही हूँ .वहीँ घूम रहा हूँ . अब मैं नैनीताल जरुर जाऊंगा .आपने बहुत ही अच्छा ,स्वाभाविक वृतांत जिखा हे .आनंद आ गया .आपको बहुत .............बड़ाई .हम सब लेखकों के लिए ये प्रेरणात्मक उदगार हमारा होंसला बढ़ाते हें .ये हमारी पूंजी हे .ये ख़ुशी हम सबकी हे .आप भी इस में शामिल हें .......आभार ..............
इश्क का आगाज हे ,कुछ मत कहो
वो अभी नाराज हे कुछ मत कहो
बांध कर पर जिसने छोड़े हें परिन्द
वो कबूतर बज हे ,कुछ मत कहो
चीखती हे बे जुबाँ खामोशियाँ
... ये वही आवाज हे कुछ मत कहो

अब हे चिड़ियों का मुहाफिज राम ही
पहरे पे इक बज हे ,कुछ मत कहो

,कमसिन 'अपनी हे गजल जेसी भी हे
हम को इस पर नाज हे ,कुछ मत कहो
....यो हम क्या करें ...गजल संग्रह

Sunday, 20 May 2012

आरती हे अजान हे ,गुरुबानी हे माँ
करुणा वात्सल्य की कहानी हे माँ
गीत -संगीत ,शब्द और ब्रह्म भी
नदी सी बहती रवानी हे माँ
कृष्णा