मित्रों ,आप सब कि दुआओं से कल ,११,मार्च को राजस्थान सहित्य अकादमी द्वारा मरी पुस्तक 'ज्योतिर्गमय ;को 'देवराज उपाध्याय पुरस्कार -२००८ -०९ ' प्रदान किया गया हे .कार्यक्रम उदयपुर में हुआ .इस पुस्तक में सांस्कृतिक निबन्ध हे .please ,ऐसे ही अपना स्नेह बनाये रखियगा . समारोह कि कुछ तस्वीरें .....
मन का आँगन रंग -रंग कर जाना
युगों -युगों से भीगी नहीं बासंती चोली
रही सदा ही सुनी -सुनी मेरी होली
पुलकन सिहरन अंग अंग भर जाना .../..
अजब हवा हे मन के मोसम बहक रहे हे
दावानल सम अधर पलाशी दाहक रहे हे
बरसा कर रति रंग दंग कर जाना ....
बरसों बाद प्रवासी प्रियतम घर आयेगें
मेरे विरह नयन लजाते सकुचायेगें a
तू पलकों में मिलन भंग भर जाना ....
कृष्णा कुमारी
(अपने कविता सग्रह से )
Saturday, 4 February 2012
गजल
छोड़ो ये किरदार की बातें
और हे संसार की बातें
साथ न देता कोई किसी का ये सब हे बेकार की बातें
भाई से भाई करता हे
अब तो बस दीवार की बातें
शादी लायक हो गया बेटा
अब होगीं व्यापर की बातें दूध के भी तो दांतन टूटे
करते हे हथियार की बातें
कडवी लगती हे बच्चों को अब तो शिष्टाचार की बातें
गुलशन में होती हे keval
काटों के श्रृंगार की बातें
हाय ज़माने मिलती हे बस
कविताओं में प्यार की बातें कमसिन कब मंजूर जहाँ को क्यूँ करती हो प्यार की बातें